आदमी को आदमी हीं रहने दो
..............................आदमी को आदमी हीं रहने दो ,
न साम्यवादी बनाओ न पूंजीवादी बनाओ ,
न हिन्दू बनाओ न मुसलमान बनाओ ।
खो जायेगी मानवता रंगों की रेस में ,
आदमी दिखेगा आतंकी के भेष में ।
कला बंध जायेगी देश की सीमाओं में ,
धर्मगुरू सोयेगें सुंदरियों की बाहों में ।
पैसा हीं बन जायेगी लोकतंत्र की महारानी ,
नेता गढेगें इंसानियत की कहानी ।
उदारीकरण की मलाई खायेगें अम्बानी ,
आप तरसेगें बिन खाना बिन पानी ।