Friday, 29 March 2013

आदमी को आदमी ही रहने दो


आदमी को आदमी हीं रहने दो

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आदमी को आदमी हीं रहने दो ,
न साम्यवादी बनाओ न पूंजीवादी बनाओ ,
न हिन्दू बनाओ न मुसलमान बनाओ ।

खो जायेगी मानवता रंगों की रेस में ,
आदमी दिखेगा आतंकी के भेष में ।

कला बंध जायेगी देश की सीमाओं में ,
धर्मगुरू सोयेगें सुंदरियों की बाहों में ।

पैसा हीं बन जायेगी लोकतंत्र की महारानी ,
नेता गढेगें इंसानियत की कहानी ।

उदारीकरण की मलाई खायेगें अम्बानी ,
आप तरसेगें बिन खाना बिन पानी ।

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