Friday, 21 September 2012

आखिर हम पानी क्यों खरीदें ?

 

शेखर सुमन सिन्हा ; नई दिल्ली ,21 सितम्बर 

हवा के बाद पानी जीवन की सबसे मूलभूत  आवश्यकता है  .  यह एक प्राकृतिक संसाधन है  . इसपर मनुष्य  के साथ -साथ पृथ्वी पर रहने वाले सभी जीव जंतुओ  का बराबर का अधिकार है .संयुक्त राष्ट्र  ने जुलाई 2010 में स्वच्छ जल को मानवाधिकार  घोषित किया है .भारतीय संविधान भी जीवन के अधिकार (अनु0-21) के अंतर्गत स्वच्छ जल को मौलिक अधिकार मानती है .लेकिन फिर भी इसे हम खरीद कर पीते है .
     
                             सवाल यह है कि आखिर हम इसे क्यों खरीदें ?हम तो लाखों वर्षों से नदी ,नाले , झरनों  एवं तालावों के पानी को स्वच्छ तरीकों  से प्रयोग करते आ रहें हैं . इसे हमने दूषित नहीं किया है .  देश - विदेश के बड़े -बड़े कंपनियों ने इसे दूषित किया है . अब वहीँ कम्पनियाँ इसे साफ कर हमें बेच रही  है .यह कहाँ का न्याय है कि गंदगी कोई और फैलाये और सफाई का पैसा कोई और दे ? ये कम्पनियाँ पानी को दूषित करने के दोषी हैं।

                             हमलोग तो कंपनियों द्वारा साफ किया  पानी  खरीद भी लेते हैं : उन जीव -जंतुओं का क्या होगा जो पूरी तरह नदी -तलावों के पानी पर निर्भर है ? ये जीव -जंतु  डालर और रूपया कहाँ से लायेंगें ? अगर ये प्यासे  मरते हैं तो इसका दोषी कौन होगा ?

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