अमेरिका तालिबान समझौता
अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने अफगानिस्तान में अपनी जीत की घोषणा कर दी । िउन्होंने रेडियो पर जारी संदेश में कहा है कि 11 वर्षों से जारी लड़ाई खत्म हो चुकी है । हमनें अलकायदा को नष्ट कर दिया है (wasington had achieved its prime goal of "dicapitating" al-queda ) । अब अलकायदा अमेरिका पर हमला करने के लिये अफगानिस्तान की धरती का इस्तेमाल नहीं कर सकता है ,लेकिन उन्होंनें तालिबान को खत्म करने की बात नहीं की । उन्होंनें आगे कहा कि " we have pushed the taliban out of thier strogholds । "
तालिबान अफगानिस्तान का बहुत पुराना संगठन है । इसे कमजोर तो किया जा सकता है लेकिन खत्म नहीं । इसका मुख्य कारण यह है कि इसे बड़े पैमानें पर अफगान नागरिकों का समर्थन प्राप्त है । राष्ट्रपति हामिद करजई इसके महत्व को पहले से ही समझते रहे हैं । वे कई बार इनसे समझौता करने का प्रयास कर चुके हैं । करजई की अमेरिकी यात्रा (शनिवार 12 जनवरी ) इसी वार्ता को आगे बढ़ाने के लिये की गयी थी । आखिर में अमेरिका तालिबान से वार्ता के लिये राजी हो गया है । तालिबान को कत्तर में अपने राजनीतिक कार्यालय खोलने की अनुमति दे दी गई है ताकि तालिबान लड़ाकों को वार्ता की मेज पर लाया जा सके ।
यह महत्वपूर्ण समझौता है क्योंकि अमरिका जिसे खत्म करने की बात कर रहा था उसके साथ शांति वार्ता के लिये राजी हुआ है । शायद अमेरिका को समझ में आ गया है कि सिर्फ बंदुक के दम पर लड़ाई नहीं जीती जाती । नि:सन्देह रुप से यह अमेरिका की सराहनीय पहल है । िइससे अमेरिका युध के बाद बचे चिंगारी को सुरक्षित तरीके से किनारे लगा सकता है । यह अमेरिका से ज्यादा भारत के लिये फायदेमंद है क्योंकि तालिबान और अलकायदा अब अमेरिका पर हमला करने में सक्षम नहीं है लेकिन वह भारत में पांव पसार सकता है
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